शनिवार, 21 सितंबर 2019

Maje dar chutkule

Maje dar chutkule
माँ - चेतन बेटा! तुम सबेरे सबेरे बिना कुछ खाऐ कहां जा रहे हो?
चेतन - माँ! अभी अभी बड़े भैया के हाथ में दो चांटे खा चुका हूँ |
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भिखारी - बाबूजी, चाय केे लिए दस रुपए दे दीजिए।
बाबूजी - लेकिन चाय तो पांच रुपए की आती है।
भिखारी - बाबूजी! क्या आप नहीं पिएंगे?
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अध्यापक (छात्र से) - चांद और धरती में क्या संबंंध है।
छात्र -श्रीमान्! भाई बहन का।
अध्यापक - कैैसे?
छात्र - क्योंकि धरती को हम मांं कहते हैं और चंदा को मामा।
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अध्यापक (छात्र से) - शाला का क्या अर्थ है?
छात्र - श्रीमान्! शाला वह कैद हैं जहां  रोज छूटकर अगले दिन फिर जाकर उपस्थिति लगवानी पड़ती है।
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एक मित्र (दूसरे मित्र से) शादी के समय दुल्हे को घोड़े पर अकेले क्यों बिठाया जाता है?
दूसरा मित्र - उसे मौका दिया है। बेटा, अभी भी समय है भाग जा। 

शनिवार, 14 सितंबर 2019

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Ek line

Ek line
*अपने आचरण से ही दूसरो को प्रभावशाली शिक्षा दी जा सकती है ! 
*अज्ञानी होना उतनी शर्म की बात नहीं है, जितना कि सीखने की इच्छा न करना ! 
*मौन एक साधना है ! किन्तु सोच समझकर बोलना एक कला है ! 
*वो हाथ सदा पवित्र होते हैं, जो प्रार्थना से ज्यादा सेवा के लिए उठते हैं ! 
*एकान्त में भी गुनाह करने से बचो, क्योंकि इसका गवाह स्वयं ईश्वर होता है ! 
*ईश्वर चित्र में नहीं, चरित्र में बसता है, अपनी आत्मा को मन्दिर बनाओ ! 
*लक्ष्य के आधे रास्ते से वापस लौटने पर भी आधा रास्ता तय करना पड़ता है ! 
*नकारात्मक विचारों को सकारात्मक विचारों से बदलने पर नतीजे स्वतः ही सकारात्मक होने लगते हैं ! 
*जीवन में सिर्फ जीना मायने नहीं रखता, बल्कि सच्चाई के साथ जीना मायने रखता है ! 
*दूसरे आपके बारे में क्या सोचते हैं, और आप अपने बारे में क्या विचार रखते हैं, ज्यादा अहम बात है ! 
  • *फूल यूही नहीं खिलते, बीज को दफन होना पड़ता है ! 

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