Maje dar chutkule
माँ - चेतन बेटा! तुम सबेरे सबेरे बिना कुछ खाऐ कहां जा रहे हो?
माँ - चेतन बेटा! तुम सबेरे सबेरे बिना कुछ खाऐ कहां जा रहे हो?
चेतन - माँ! अभी अभी बड़े भैया के हाथ में दो चांटे खा चुका हूँ |
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भिखारी - बाबूजी, चाय केे लिए दस रुपए दे दीजिए।
बाबूजी - लेकिन चाय तो पांच रुपए की आती है।
भिखारी - बाबूजी! क्या आप नहीं पिएंगे?
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अध्यापक (छात्र से) - चांद और धरती में क्या संबंंध है।
छात्र -श्रीमान्! भाई बहन का।
अध्यापक - कैैसे?
छात्र - क्योंकि धरती को हम मांं कहते हैं और चंदा को मामा।
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अध्यापक (छात्र से) - शाला का क्या अर्थ है?
छात्र - श्रीमान्! शाला वह कैद हैं जहां रोज छूटकर अगले दिन फिर जाकर उपस्थिति लगवानी पड़ती है।
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एक मित्र (दूसरे मित्र से) शादी के समय दुल्हे को घोड़े पर अकेले क्यों बिठाया जाता है?
दूसरा मित्र - उसे मौका दिया है। बेटा, अभी भी समय है भाग जा।